2050 में भारत में कैसा होगा पशु पालन? वर्तमान समय में उन्नत पशु पालन कैसे करें? जानें
2050 में भारत में कैसा होगा पशु पालन? वर्तमान समय में उन्नत पशु पालन कैसे करें? जानें वर्तमान समय में हमें सबसे पहले अपनी पारम्परिक गलतियां सुधारनी होगी और बाजार में उपलब्ध आधुनिक तौर तरीकों को अपनाना होगा। मुनाफे को दोगुना करने और लागत को कम करने के लिए पांच स्टेप पर काम करना होगा। 1- वैज्ञानिक एवं तकनीकी आवास प्रबंधन - पशुओं को धूप बारिश से बचाना ही काफी नहीं है, उचित जल निकासी, समय समय पर रोगाणु मुक्त करना, घूमने बैठने की आराम दायक जगह, पशु को एक जगह बांधने की बजाय एक कवर्ड एरिया में खुला छोड़ दें, जिससे पशु स्ट्रेट फ्री रहकर अच्छा उत्पादन कर सके, साफ सफाई प्रति दिन बहुत आवश्यक है। एक साफ ताजे पानी की व्यवस्था हर समय करें, जिससे पशु को प्यास लगने पर पानी पी सके और 15-20% अधिक दूध उत्पादन कर सके। 2- नस्ल सुधार - अधिक पशु रखने से अच्छा है, ज्यादा दूध देने वाले कम पशु रखें,Sex sortage seman का प्रयोग - कृत्रिम गर्भाधान कराते समय केवल सेक्स सोर्टेज सीमेन का ही प्रयोग करें जिससे 90% फीमेल उत्पादन होगा और नर बछड़े पालने का खर्च बचेगा। 3- स्वेदेशी नस्लों को प्राथमिकता - आज के समय में गिर, साहीवाल, थारपारकर, जैसी गायों और मुर्रा, भदावरी,मिनी एलीफेंट जैसी अधिक दूध फैट वाली भैंसों के A 2 दूध की अधिक मांग है जो उच्च रेट पर बिकता है। देशी नस्लों में विदेशी की अपेक्षा बीमारियों से लड़ने की क्षमता अधिक होती है। काऊ मैट और पंखे - ढलानदार फर्श पर रबर के मैट बिछाएं जिससे पशु के खुर खराब न हो, और बैठने में आसानी हो, कीचड़ आदि से बचाव हो, गर्मियों में फोगर्स और पंखे लगाएं जिससे पशु हांफे न और दूध अधिक दे। थका और हांफता हुआ पशु कभी पूरा दूध नहीं दे सकता है। 3- सटीक पोषण - टोटल मिक्स राशन - हरे चारे, सूखे चारे दाने को अच्छी तरह मिला कर खिलाएं, गर्मियों में पशु को हरा चारा नहीं मिलता तब साइलेज पशुओं को भरपूर पोषण देता है और दूध स्तर गिरने नहीं देता है। साइलेज - सर्दियों में हरा चारा अधिक होने पर उसे काटकर सुखा कर रख लें,या काटकर गढ्ढे में दबा कर रख दें गढ्ढे में हवा न जाने पाए, ये साइलेज गर्मियों में उपयोग कर सकते हैं। मिनरल मिक्सचर - अच्छी कम्पनी का मिनरल मिक्सचर 50 ग्राम पशु के दैनिक आहार में दें, जिससे पशु समय पर हीट में आयेगा और रिपीट ब्रीडिंग की समस्या नहीं होगी। डेटा रिकॉर्ड - एक डायरी या ऐप (ई गोपाला) में लिख सकते हैं कि कौन से पशु ने कब बच्चा दिया,कब हीट पर आई,कब AI कराई आदि, पशु का दूध और वंशावली भी लिख सकते हैं, इससे हमें ज्ञात रहेगा कि कौन सा पशु कैसा है। मिल्किंग मशीन - अगर आपके पास 5-10 दुधारू गाय भैंस है तो मिल्किंग मशीन का प्रयोग जरूर करें, इससे थन सुरक्षित रहते हैं, दूध साफ निकलता है,लेवर मजदूर पर निर्भर कम रहना पड़ता है। सरकारी योजनाओं, सब्सिडी का लाभ उठाना - राष्ट्रीय गोकुल मिशन - इसके तहत नस्ल सुधार और सेक्सड सीमेन पर भारी सब्सिडी मिलती है। AHIDF - इसके तहत आप डेयरी फार्म, साइलेज मेकिंग, मिल्क प्रोडक्ट्स, मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट आदि के लिए 3% ब्याज की छूट और सब्सिडी मिलती है। पशु किसान क्रेडिट कार्ड - खेती की तरह पशुपालन पर भी पशु की खरीद,चारे आदि के लिए लोन मिलता है, बेहद ही कम ब्याज 4% पर मिलता है। 2050 तक भारत में इस तरह होगा पशु पालन 1- पशु आधार -भारतीय पशु धन और डिजिटल लाइव स्टोक मिशन के तहत पशु धन डिजिटल आईडी कार्ड बनना शुरू हो गया है,2050 तक पशु आधार हर पशु का होगा,जिस तरह आज हर नागरिक के पास आधार कार्ड है। मुफ्त ए आई डायग्नोस्टिक सिस्टम - 2050 तक AI तकनीकी से पशु के बीमार होने के पहले ही पता चल जाएगा, जिससे पशु का इलाज और रोकथाम जल्द सम्भव होगी, मुफ्त ड्रोन एम्बुलेंस होगी,जो पशु की फोटो और सेंसर की सहायता से तुरंत पशु की बीमारी और इलाज की पर्ची फ्री भेज दी जाएगी। क्रेडिट स्कोरिंग और आसान लोन - पशु के डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड के आधार छोटे बैंक तुरंत सस्ता लोन देंगे क्योंकि पशु का डिजिटल डाटा ही विश्वसनीयता की गारंटी होगा। गोबर -धन और सर्कुलर बायो इकोनॉमी - 2050 पशु केवल दूध का जरिया नहीं बल्कि ऊर्जा का स्रोत होंगे। समुदायिक बायोगैस और सीएनजी प्लांट - गांव की सरकारी समिति सभी छोटे किसानों से गोबर खरीदेगी,इस बड़े सेंट्रलाइज्ड बायोगैस प्लांट में प्रोसेसिंग करके बिजली और बायो सीएनजी बनायी जाएगी। बदले में खाद फीड मिलेगा - गोबर के बदले किसान को मीथेन कम करने वाला संतुलित चारा मिलेगा, खेती के लिए जैविक खाद बहुत कम दाम पर मिलेगी। श्वेत क्रांति 2 - हब एवं स्पाक माडल - अमूल जैसी सरकारी समिति और FPO मिलकर नये डिजिटल पशु सेवा केन्द्र खोलेंगे, जिससे किसानों को कम रेट पर सभी डिजिटल वस्तुएं किराए पर मिलेगी। गांव स्तर पर ही एक बड़ा रोबोटिक मिल्क कलेक्शन सेंटर होगा जो स्वयं ही मिल्क फैट और मिल्क शुद्धि नापकर देगा।

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